Sensex Kya Hai? : क्या कभी आपने न्यूज़ चैनल पर सुना है कि आज सेंसेक्स 500 अंक उछला या सेंसेक्स धड़ाम हुआ, आज सेंसेक्स 80,000 के पार पहुँच गया या सेंसेक्स में भारी गिरावट, निवेशकों के करोड़ों डूबे? क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह सेंसेक्स है क्या और यह अचानक ऊपर-नीचे क्यों होता रहता है, तो यह आर्टिकल पूरी तरह आपके लिए है।

इस लेख में हम सेंसेक्स (Sensex Kya Hai?) को बिल्कुल शुरुआत से समझेंगे बिना किसी भारी-भरकम फाइनेंशियल टर्म के। तो प्लीज सेंसेक्स को अच्छे से समझने के लिए यह पूरी पोस्ट जरूर पढियेगा।
सेंसेक्स क्या होता है? (Sensex Kya Hai?)
सेंसेक्स (Sensex) बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का एक स्टॉक मार्केट इंडेक्स है। इसका पूरा नाम है – S&P BSE Sensex. और यह असल में “Sensitive Index” शब्द का शॉर्ट फॉर्म है।
SENSEX शब्द दो अंग्रेजी शब्दों से मिलकर बना है:
Sensitive + Index = SENSEX
सीधी भाषा में समझें तो सेंसेक्स एक ऐसा नंबर है जो BSE पर लिस्टेड 30 सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा कारोबार वाली कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को एक साथ मिलाकर बताता है।
Sensex Kya Hai? इसे एक उदाहरण से समझिए –
मान लीजिए आपके क्लास में 30 बच्चे हैं और टीचर हर महीने पूरी क्लास का औसत प्रदर्शन एक ही नंबर में बता देती है। अगर यह नंबर बढ़ता है तो समझ लीजिए ज्यादातर बच्चों ने अच्छा किया है। सेंसेक्स भी ठीक ऐसे ही काम करता है । सिर्फ बच्चों की जगह 30 बड़ी कंपनियों के शेयर होते हैं।
अगर सेंसेक्स ऊपर जा रहा है तो इसका मतलब है कि ज्यादातर बड़ी कंपनियों के शेयरों के दाम बढ़ रहे हैं। अगर सेंसेक्स नीचे गिर रहा है तो शेयरों के दाम घट रहे हैं।
BSE पर 5000 से भी ज्यादा कंपनियां लिस्टेड है। अब अगर आपको यह पता करना हो कि आज शेयर बाजार मुनाफे में है या नुकसान में, तो क्या आप उन 5000 कंपनियों का हाल एक-एक करके चेक करेंगे? नहीं! यह असंभव है।
यहीं पर सेंसेक्स काम आता है। सेंसेक्स उन 5000 कंपनियों में से भारत की टॉप 30 सबसे बड़ी, सबसे मजबूत और सबसे सक्रिय (Active) कंपनियों का एक समूह (Group) है।
सेंसेक्स का इतिहास (History of Sensex)
सेंसेक्स को आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी 1986 को लॉन्च किया गया था। लेकिन इसकी गणना के लिए बेस ईयर 1978-79 को चुना गया था और उस समय इसकी बेस वैल्यू 100 पॉइंट तय की गई।
यानी जब सेंसेक्स 1986 में शुरू हुआ तब वैज्ञानिक तरीके से पीछे जाकर 1978-79 के आंकड़ों को आधार (base) मानकर इंडेक्स की शुरुआती वैल्यू 100 तय की गई।
दिलचस्प बात यह है कि “सेंसेक्स” शब्द खुद BSE ने नहीं गढ़ा था। इसे 1989 में शेयर बाजार के जानकार दीपक मोहनी ने Sensitive Index को छोटा करके बनाया था और बाद में यह इतना लोकप्रिय हो गया कि BSE ने भी इसे आधिकारिक रूप से अपना लिया।
| साल | घटना |
| 1978-79 | बेस ईयर तय, बेस वैल्यू = 100 |
| 1986 | सेंसेक्स आधिकारिक रूप से लॉन्च |
| 1989 | सेंसेक्स नाम गढ़ा गया |
| 2003 | फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन मेथड लागू |
| 2021 | पहली बार 50,000 के पार |
सेंसेक्स की गणना कैसे होती है?
शुरुआत में सेंसेक्स की गणना फुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पद्धति से होती थी। लेकिन 1 सितंबर 2003 से इसे बदलकर फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन पद्धति कर दिया गया । यही तरीका दुनिया के ज्यादातर बड़े इंडेक्स जैसे डाउ जोन्स और FTSE भी इस्तेमाल करते हैं।
फ्री-फ्लोट का मतलब क्या है?
किसी भी कंपनी के सारे शेयर बाजार में खरीदने-बेचने के लिए उपलब्ध नहीं होते। प्रमोटर्स (कंपनी मालिक) और सरकार के पास मौजूद शेयर आमतौर पर बिकते नहीं। सिर्फ वही शेयर जो आम जनता खरीद-बेच सकती है, उसे ही “फ्री-फ्लोट शेयर” कहते हैं।
उदाहरण के लिए – अगर किसी कंपनी के कुल 1000 शेयर हैं और उसमें से 300 शेयर प्रमोटर्स के पास हैं तो बाकी बचे 700 शेयर ही फ्री-फ्लोट माने जाएंगे। यानी फ्री-फ्लोट फैक्टर हुआ 700/1000 = 70% ।
गणना का फॉर्मूला कुछ इस तरह है –
सेंसेक्स = (सभी 30 कंपनियों का कुल फ्री-फ्लोट मार्केट कैप ÷ बेस मार्केट कैपिटल) × 100
इंडेक्स की गणना ट्रेडिंग के घंटों में लगातार होती रहती है और हर 15 सेकंड में इसे अपडेट किया जाता है।
सेंसेक्स में कंपनियां कैसे चुनी जाती हैं?
BSE पर हजारों कंपनियां लिस्टेड हैं लेकिन सेंसेक्स में सिर्फ 30 सबसे बड़ी कंपनियों को शामिल किया जाता है। इसके लिए कुछ मुख्य पैमाने (criteria) देखे जाते हैं –
- कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (कंपनी की कुल बाजार कीमत) बड़ा होना चाहिए
- शेयर में लिक्विडिटी यानी आसानी से खरीद-बिक्री होनी चाहिए
- प्रतिदिन ट्रेडिंग वॉल्यूम ज्यादा होना चाहिए
- कंपनी भारत के अलग-अलग सेक्टर्स का प्रतिनिधित्व करे
समय-समय पर इन कंपनियों की समीक्षा होती है और अगर कोई कंपनी अपना प्रदर्शन खो देती है तो उसे हटाकर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनी को जोड़ दिया जाता है।
सेंसेक्स क्यों महत्वपूर्ण है?
सेंसेक्स को भारतीय शेयर बाजार का “बैरोमीटर” कहा जाता है। यानी यह बताता है कि पूरा बाजार किस दिशा में जा रहा है।
• निवेशकों के लिए – सेंसेक्स देखकर पता चलता है कि बाजार का मूड कैसा है
• म्यूचुअल फंड्स के लिए – कई म्यूचुअल फंड और इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स के प्रदर्शन को सेंसेक्स से कंपेयर (बेंचमार्क) किया जाता है।
• अर्थव्यवस्था के लिए – सेंसेक्स की चाल देश की आर्थिक सेहत का भी एक संकेत मानी जाती है।
• वैश्विक स्तर पर – दुनिया भर के निवेशक भारतीय बाजार में पैसा लगाने से पहले सेंसेक्स को ट्रैक करते हैं।
मशहूर निवेशक वॉरेन बफे अक्सर कहते हैं कि शेयर बाजार अल्पकाल में “वोटिंग मशीन” है लेकिन लंबे समय में “वेटिंग मशीन” । यानी छोटी अवधि में बाजार भावनाओं पर चलता है पर लंबे समय में असली वैल्यू ही जीतती है। सेंसेक्स के इतिहास पर नजर डालें तो यह बात बिल्कुल सटीक बैठती है कि बीच-बीच में गिरावट के बावजूद यह लंबी अवधि में लगातार ऊपर की तरफ बढ़ा है।
सेंसेक्स और निफ्टी में क्या अंतर है? (Sensex vs Nifty 50)
भारत में शेयर मार्केट के दो सबसे बड़े इंडेक्स हैं – सेंसेक्स और निफ्टी 50। आइए इनके बीच का अंतर समझते हैं –
|
फीचर (Feature) |
सेंसेक्स (Sensex) |
निफ्टी 50 (Nifty 50) |
|---|---|---|
|
स्टॉक एक्सचेंज |
BSE (Bombay Stock Exchange) |
NSE (National Stock Exchange) |
|
कंपनियों की संख्या |
भारत की टॉप 30 कंपनियां |
भारत की टॉप 50 कंपनियां |
|
स्थापना का वर्ष |
1986 |
1996 |
|
बेस वैल्यू |
100 पॉइंट (1978-79 के अनुसार) |
1000 पॉइंट (1995 के अनुसार) |
सेंसेक्स में उतार-चढ़ाव क्यों आता है?
सेंसेक्स की चाल कई चीजों पर निर्भर करती है –
1. कंपनियों के तिमाही नतीजे – अगर बड़ी कंपनियां अच्छा प्रदर्शन करती है या मुनाफा दिखाती हैं तो बाजार ऊपर जाता है।
2. RBI और सरकार की नीतियां – ब्याज दरें बढ़ने या घटने का सीधा असर।
3. वैश्विक घटनाएं – जैसे अमेरिकी बाजार का प्रदर्शन, कच्चे तेल की कीमतें, या वैश्विक मंदी।
4. राजनीतिक स्थिरता – चुनाव के नतीजे और सरकार की नीतियां।
5. विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधि – जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में पैसा लगाते या निकालते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
दोस्तों हमे पूरा उम्मीद है कि आपको समझ आ गया होगा कि सेंसेक्स क्या होता है (Sensex Kya Hai)। सेंसेक्स भारत की अर्थव्यवस्था का खास अंग है। जब देश में सब कुछ अच्छा चलता है या व्यापार बढ़ता है तो सेंसेक्स ऊपर जाता है।
अगर आप शेयर बाज़ार की रिस्क से बचना चाहते हैं तो आप किसी भी सेंसेक्स इंडेक्स फंड (Sensex Index Fund) में अपनी मासिक SIP शुरू कर सकते हैं। इससे आपका पैसा अपने-आप देश की टॉप 30 कंपनियों में लग जाएगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q.1 – सेंसेक्स का पूरा नाम क्या है?
उत्तर – सेंसेक्स का पूरा नाम Sensitive Index है, और आधिकारिक नाम है S&P BSE Sensex है।
Q. 2 – सेंसेक्स कितनी कंपनियों को मिलाकर बनता है?
उत्तर – सेंसेक्स BSE पर लिस्टेड 30 सबसे बड़ी कंपनियों को मिलाकर बनता है।
Q. 3 – सेंसेक्स की बेस वैल्यू क्या थी?
उत्तर – सेंसेक्स की बेस वैल्यू 100 थी जो 1978-79 के आधार पर तय की गई थी।
Q. 4 – सेंसेक्स और निफ्टी में क्या अंतर है?
उत्तर – सेंसेक्स BSE का इंडेक्स है जिसमें 30 कंपनियां होती हैं जबकि निफ्टी NSE का इंडेक्स है जिसमें 50 कंपनियां होती हैं।
Q. 5 – सेंसेक्स कितनी बार अपडेट होता है?
उत्तर – ट्रेडिंग के घंटों के दौरान सेंसेक्स हर 15 सेकंड में अपडेट होता रहता है।
Q. 6 – क्या मैं सेंसेक्स में सीधे पैसे लगा सकता हूँ?
उत्तर – आप सीधे सेंसेक्स को नहीं खरीद सकते क्योंकि यह एक सूचकांक (Index) है। लेकिन आप ‘Sensex Index Mutual Fund’ या ‘Sensex ETF’ खरीदकर सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियों में एक साथ निवेश कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर
यह आर्टिकल केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है, यह निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।